भारत के ग्यारह प्रसिद्ध काली मंदिर 11 Famous Kalika Temples In India To Visit In Hindi
11 Famous Kalika Temples In India To Visit In Hindi
कालीजी को निराकार अनाद्यन्ता त्रिदेव जननी आदि शक्ति के विकरालतम रूपों में माना जाता है। दुष्टों के लिये अतिभयंकर इनका रूप भक्तों के लिये सौम्य रहता है जिससे इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है। काली कुपित होने पर इच्छा मात्र से महाप्रलय ला देती हैं तो प्रसन्न होने पर सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड भक्त के हाथों सौंप देती हैं।
भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों में कई महाकाली मंदिर ऐसे हैं जो किसी न किसी कारण से प्रसिद्ध अथवा विशेष हैं, जैसे कि शक्तिपीठों में से अनेक तो महाकाली मंदिर हैं. माता सती के शरीर के अंग, आभूषण व वस्त्र जहाँ-जहाँ गिरे उस स्थान को शक्तिपीठ कहा जाता है।
वैसे अनेक शक्ति पीठों के स्थानों, गिरे अंगों, आभूषणों व वस्त्रों के सन्दर्भ में विरोधाभास मिल सकता है। जब भी किसी मंदिर के अमुक-अमुक शताब्दी पुराना होने का उल्लेख हो तो समझ जायें कि स्थान व घटना तो बहुत पुरानी होगी परन्तु भवन व परिसर व मंदिर बाद में बनाया गया हुआ हो सकता है.
विदेशी आक्रान्ताओं द्वारा तोड़े जाने के बाद भी कई मंदिर दोबारा-तिबारा व अधिक बार बनाये गये। इस आलेख में विशेष अथवा प्रसिद्ध महाकाली मंदिरों का विवरण दर्शाया जा रहा है.
11 Famous Kalika Temples In India To Visit In Hindi
1. कुरुक्षेत्र का भद्रकाली मंदिर (Bhadrakali Temple of Kurukshetra)
इसे शक्तिपीठ श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर, सावित्री पीठ, देवी पीठ, कालिका पीठ एवं आदि पीठ भी कहा जाता है। माता सती का दाहिना गुल्फ (टखना) यहाँ गिरे होने का अतीत है। ऐसी मान्यता है कि महाभारत के युद्ध में बढ़ने से पहले श्रीकृष्ण सहित पाण्डवों ने अपनी विजय के लिये यहाँ प्रार्थना की थी।
2. जनस्थान (नासिक) का श्रीभद्रकाली देवी शक्तिपीठ (Maa Bhadrakali Nasik)
यहाँ सती माता का चिबुक गिरा था, यहाँ भद्रकाली की विशाल प्रतिमा है। आसपास छोटी-छोटी नौ पहाड़ियाँ विद्यमान हैं।
3. श्री भद्रकाली देवास्वोम मंदिर ( Sree Bhadrakali Devaswom Temple)
यह मंदिर केरल की सीमा के समीप तमिलनाडु के कन्याकुमारी जिले के कोल्लेमकोडे ग्राम में पड़ता है। ये कलियुग के कलुष से बचाने वाली मानी जाती हैं। अरब सागर से ‘ओमकार’ जैसी ध्वनि सुनायी देती है एवं ब्रह्माण्ड के हृदय से ‘तत्त्वमसि’ का संदेश प्रसारित होता प्रतीत होता है।
4. पश्चिम बंगाल में कालीघाट कालीपीठ (Kalighat Mandir)
कलकत्ता के इस कालिका मंदिर में सती माता के बायें पैर का अँगूठा गिरा था। यह पीठ स्थान हुगली नदी के पूर्वी तट के समीप है।
5. दक्षिनेश्वरी कालीमंदिर (Dakshineswar kali Temple)
हुगली नदी के पूर्वी तट पर दक्षिणेश्वर में यह मंदिर है। यहाँ की देवी भवतारिणी (जीव की नैय्या को संसार-सागर से पार उतारने वाली) कहलाती हैं जो कि आदि शक्ति कालिका का एक रूप हैं।
यह मंदिर एक परोपकारिणी एवं कालीभक्त रानी रासमणि ने सन् 1855 में बनवाया था। इस मंदिर से भारतीय मनिशी श्री रामकृष्ण परमहंस एवं संत माँ शारदा देवी (रामकृष्ण परमहंस की पत्नी) का घनिष्ट जुड़ाव रहा।
6. कालमाधव शक्तिपीठ कालीपीठ (Kalmadhav Shakti Peeth)
इसके स्थान के बारे में संशय है किन्तु अभी छत्तीसगढ़ सीमा के निकट एवं मध्यप्रदेश के अमरकण्टक में यह काली मंदिर शोण नदी के समीप है. यहाँ माता सती का बायाँ नितम्ब गिरा था। एक अन्य प्रधान देवी मंदिर भी अमरकण्टक में ही शहडोल में नर्मदा के उद्गम के निकट शोणदेश में माता मंदिर के रूप में भी है जहाँ सती माता का दाहिना नितम्ब गिरा था।
7. रुद्रप्रयाग का कालीमठ ( Kalimath Temple Rudraprayag )
उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग जिले में सुरम्य पर्वतीय क्षेत्र में सरस्वती नदी के तट पर एवं 1800 मीटर्स की ऊँचाई पर यह कालीमठ स्थित है जहाँ काली मंदिर है। यह एक सिद्धपीठ है।
कहा गया है कि यहाँ काली ने रक्त बीज को मारा था एवं फिर यहीं से धरती में प्रवेष कर गयीं थीं। यह ऐसा दुर्लभ स्थान है जहाँ देवी काली की पूजा लक्ष्मी व सरस्वती देवियों के संग की जाती है।
8. भीमाकाली मंदिर (Bhimakali Temple)
व्यास नदी के तट पर हिमाचल प्रदेश में मण्डी जिला में यह मंदिर स्थित है। मंदिर का नाम भीमा एवं मंदिर की देवी का नाम भीमाकाली है। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने बाणासुर का वध यहीं किया था।
9. थिलई काली अम्मान मंदिर (Thillai Kali Temple)
यह काली मंदिर तेरहवीं शताब्दी का होने का अनुमान है। यह तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले में चिदंबरम् कस्बे में है। इस मंदिर में मुख्य दो उपमंदिर हैं. पश्चिममुखी विग्रह जो कि सौम्य रूप में हैं जिन्हें ब्रह्म चामुण्डेश्वरी भी कहा जाता है.
इनके चार मुख दिख रहे हैं एवं पूर्वमुखी देवी थिलई काली के रूप में जानी जाती हैं जो उग्र रूप में हैं। अन्य उपमंदिरों में वीणा विद्याम्बिगाई के रूप में सरस्वती हैं एवं दक्षिणमूर्ति के रूप में कदम्बवन दक्षिणा रूपिणी हैं।
10. पावागढ़ का कालिका माता मंदिर (Kalika Mata Temple Pavagadh )
पावागढ़ पहाड़ी के शिखर पर एवं समुद्रस्तर से 762 मीटर्स की ऊँचाई पर स्थित यह मंदिर दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी का होने का अनुमान है। यहाँ हिन्दू तीर्थयात्री उस समय के भी बहुत पहले से आ रहे हैं जब बड़ी नगरी के रूप में चम्पानेर का विकास किया गया था।
पहाड़ी के शिखर तक पहुँचने के लिये वैसे तो रोपवे की व्यवस्था की जा चुकी है परन्तु वनक्षेत्र में 5 किलोमीटर्स की चढ़ायी पदयात्रा के रूप में करने का नैसर्गिक व धार्मिक आनन्द अलग ही है। भीतर के गर्भगृह में कालिका माता का लाल मुख ही विग्रह के रूप में दिखायी देता है। साथ में महाकाली की पूर्ण मूर्ति एवं बहुचरा के यंत्र भी हैं।
11. कन्याश्रम में भद्रकाली मंदिर (Kanyasharma Bhadrkali Temple)
तमिलनाडु में कुमारी मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित यह शक्तिपीठ है जहाँ माता सती की पीठ गिरी थी। यहाँ माता सती को शर्वाणी अथवा नारायणी एवं शिवजी को निमिश अथवा स्थाणु कहा जाता है। तमिलनाडु में तीन सागरों (अरब सागर, हिन्द महासागर एवं बंगाल की खाड़ी) के संगम पर स्थित यह भद्रकाली मंदिर कन्याकुमारी में है।
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