हर्पीस क्या है ? हर्पीस में क्या नहीं खाना चाहिए ? Harpes me kya nahi khana chahiye
हर्पीस के बारे में आपने कभी जरुर सुना होगा अगर नहीं सुना तो आज हम आपको हर्पीस के बारे में बताने जा रहे है। हर्पीस एक इन्फेक्शन होता है जो कि मानव शरीर में पाया जाता है यह वायरस सिम्प्लैक्स वायरस ( Simplex Virus) के कारण होता है।
हर्पीस नामक इस वायरस में मानव शरीर में घाव हो जाते है जैसे मोटे और लाल रंग के दाने हो जाते है। ये घाव ज़्यादातर चेहरे पर या फिर जांघो पर होते है और इसमें कई बार मरीजों को फफोलो की जगह पर बहुत दर्द की भी शिकायत होती है जिस वजह से वो कमज़ोरी महसूस करता है और उसे बुखार और बेचैनी भी महसूस होती है।
इसीलिए दोस्तों हम आपको Harpes नामक इस रोग से बचाने के लिए बहुत सी जानकारियाँ लेकर आये है जिसे पढ़ने के बाद आपमें इस रोग से लड़ने की क्षमता पैदा होती है। बस इस रोग से लड़ने के लिए आपको कुछ बातो का विशेष तौर पर ध्यान रखना होता है जो की हम आपको इस आर्टिकल में बताने जा रहे है ।
Harpes me kya nahi khana chahiye
हर्पीस क्या है ?
बहुत से लोग हर्पीस के बारे में नहीं जानते.. जी हां दोस्तों ये एक ऐसा संक्रामक रोग है की अगर कोई व्यक्ति इस रोग से ग्रसित हो भी जाये तो भी वे समझ नहीं पाते कि ये कौन सा रोग है तो आज इस आर्टिकल में आपको यही जानने को मिलेगा की हर्पीस होता क्या है।
Harpes Virus के ज़रिये होने वाला एक संक्रामक रोग है। हर्पीस नामक इस वायरस में अक्सर कोई भी व्यक्ति मोटे मोटे दानो का शिकार हो जाता है जिनमे दर्द के साथ बुखार व थकान भी महसूस होती है। ये दाने अधिकतर पेरो के बीच में होते है और उसके पास लाल रंग के घाव हो जाते है पीड़ा का सामना करना पड़ता है।
इस रोग से बचाव के लिए बहुत हिदायत बरतने की आवश्यकता होती है खान पान पर ध्यान देने की ज़रूरत है इसीलिए हम आपके लिए इस आर्टिकल में बहुत सी ऐसी जानकारिया लेकर आये है जिससे आपको इसके लक्षण, कारण और उपाय के बारे में भी बहुत कुछ पता चलेगा और आप इस बीमारी से आसानी से बच पाएंगे।
हर्पीस में क्या नहीं खाना चाहिए ?
मीठे पदार्थो से परहेज करे :
दोस्तों हर्पीस में आपको कुछ परहेज करने की ज़रूरत होती है इसलिए बहुत से शोध में ये पता चला है इस रोग से ग्रसित रोगियो को मिठाइयाँ, केमिकल युक्त कोई भी ड्रिंक, केक या अधिक मीठे पदार्थो से जितना दूर रहे ये रोग उतनी ही जल्दी खत्म होता है।
डिब्बा बंद खाने को ना कहे :
दोस्तों डिब्बा बंद खाना सेहत के लिए बिलकुल भी सही नहीं होता है क्योकि ये मानव शरीर को धीरे धीरे कमज़ोर और आदी बना लेता है। जैसे आपको पैकेट वाले खाने में कभी भी कोई भी गुणवत्ता नहीं मिलेगी.
क्योकि ये अर्टिफिशिअल ट्रांस फैट ( Artificial trans fat) और बहुत ही बेकार क्वालिटी के लिए जाने जाते है जिनमे कोई भी पौष्टिकता नहीं होती और साथ ही हर्पीस हो जाने पर ये पैकिंग वाले खाद्य पदार्थ आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता को और कम कर देता है इसलिए ऐसे डिब्बा बंद खाने से ( processed food ) से दूर रहे।
किसी भी नशे से दूर रहे :
दोस्तों.. क्या आप जानते है की हर्पीस का रोग हो जाने पर इतनी कमज़ोरी आ जाती है कि हम हर समय खुद को बीमार महसूस करते है उस पर यदि आप किसी भी नशे जैसे शराब, बीड़ी या सिगरेट का सेवन कर रहे है तो आप अपने शरीर को बीमारियों का घर दे रहे है और ऐसे में हर्पीस के पुनः होने के आसार बढ़ जाते है ।
नशा करने पर हमारे शरीर की कोशिकाएं रोगो से लड़ने में भी असमर्थ हो जाती है यदि हम निरंतर नशा कर रहे है तो ऐसे में ये हर्पीस जैसे संक्रामक रोग खत्म नहीं होने देता । इसीलिए नशा से दूर रहे और स्वय को बचाये।
हर्पीस के लिए डाइट चार्ट
विटामिन्स शामिल करे अपने आहार में: Vitamin A, C , E आपकी सेहत के लिए बहुत ज़रूरी आहार है. ये आपको बहुत सी बीमारियों से दूर रखते है इसीलिए हर्पीस जैसे रोग से बचने के लिए ये Vitamins सबसे उत्तम बताये गए है क्योकि ये हमारे शरीर को infection से बचाने का काम करते है जो की Antioxidants से भरपूर माने जाते है।
ये एक healthy source पाया गया है क्योकि ये आपकी कोशिकाओं को मजबूत बनाता है और आपका immune system बेहतर बनाने में मददगार साबित होता है।
विटामिन A – हरी पत्तेदार सब्ज़िया , अंडा , पालक , पपीता , सोयाबीन और दूध में विटामिन A की मात्रा पाई जाती है और इसने कुछ पदार्थ आप नाश्ते में और कुछ दोपहर के खाने में शामिल करे।
विटामिन C : खट्टे फल जैसे संतरा, कीवी, मोसम्बी, ऑवला व टमाटर आदि का सेवन आपको मजबूत Immune System प्रदान करता है। विटामिन C पानी में अच्छे से घुल जाता है इसी कारण ये हमारे शरीर के रोगो से लड़ने में मदद करता है।
Example – पालक, हरी सब्जियाँ, नट्स, बादाम, पिस्ता, अखरोट व मूंगफली आदि जैसी चीज़े खाने में बहुत ही लाभकारी सिद्ध होती है। आप इन खाद्य पदार्थो को सुबह नाश्ते में खा सकते है।
विटामिन E : विटामिन E एंटीऑक्सीडेंट्स का बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है क्योकि ये आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है मतलब की रोगो से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है व साथ ही free radicals से कोशिकाओं को बचाता है। example – बादाम, अखरोट, vegetable oil, पालक, सूरजमुखी के बीज व ब्रोकली आदि का सेवन नास्ते में या फिर दिन में एक बार कभी भी कर सकते है।
Note :
- 6 से 1 साल के बच्चे को केवल 5mg प्रतिदिन
- 3 साल के बच्चे को केवल 6mg प्रतिदिन
- 4 से 8 साल के बच्चे को केवल 7mg प्रतिदिन
- 9 से 13 साल के बच्चे को केवल 11mg प्रतिदिन
- 14 साल से ज़्यादा उम्र के व्यक्ति 15mg प्रतिदिन इसका सेवन करे,
- स्तनपान कराने वाली महिलाओं को 19mg प्रतिदिन देना चहिए।
हर्पीज़ के लक्षण
हर्पीस जैसे रोग को आप शुरुआती लक्षण में ही पहचान सकते है यदि आपको इसके लक्षण की पहचान है तो और यदि नहीं है तो यहाँ कुछ लक्षण बताये जा रहे है।
- हर्पीस में चेहरे पर लाल रंग के फफोले होते है।
- इसकी पहचान है की ये शरीर के एक तरफ होते है।
- इस दानो में काफी दर्द होता है और उनमे खुजली भी बहुत होती है।
- इस इन्फेक्शन में बदन दर्द और बुखार की शिकायत होती है।
- ये इन्फेक्शन कई बार वायरल इंसेफेलाइटिस (Viral Encephalitis) का कारण बन जाता है।
हर्पीस के घरेलू उपाय
टी ट्री आयल ( tea tree oil) : टी ट्री आयल की 2 या 4 बुँदे रुई पर लगाकर दानो पर दिन में 2 या 3 बार लगाए।
एसेंशियल आयल ( essential oil) : एसेंटिअल आयल की 2, 4 बुँदे दिन में दो से तीन बार इन दानो के ऊपर लगाने से ये दाने जल्दी ही ख़तम हो जाते है।
वैसेलिन ( पेट्रोलियम जेली ) (petroleum jelly) : आप पेट्रोलियम जेली को प्रतिदिन हर्पीस के दाने पर लगा सकते है इसके कोई साइड इफेक्ट्स भी नहीं है।
एलोवेरा जेल ( aloe vera gel) : एलोवेरा के पौधे से आप इसका जेल निकाल कर हर्पीस जैसी बीमारी दूर कर सकते है। क्योकि इसमें एंटीवायरल व मॉस्चुराइजिंग इफेक्ट्स पाए जाते है जोकि आपके घावों को नष्ट भी करता है।
जैतून का तेल (olive oil) : जैतून का तेल हर्पीस नामक इन्फेक्शन के लिए anti virus और anti virul property का काम करता है और इसे आप lavender oil के साथ मिक्स करके अपने फफोलो पर लगा सकते है ।
FAQ ON Harpes
Q – हर्पीस अधिकतर किस मौसम में होता है ?
A – हर्पीस होने का खतरा सर्दी और बारिश में अधिक बढ़ जाता है।
Q – हर्पीस को ठीक होने में कितना समय लग सकता है ?
A – ये मरीज की सेहत पर निर्भर करता है कि ये बीमारी सही होने में कितना समय लेती है।
Q – क्या गर्भवती महिलाओ के बच्चे को हर्पीस संक्रमण होने की संभावना होती है ?
A – यदि हर्पीस गर्भवती महिला के जननांग पर होता है तो गर्भ में बच्चे को भी होने की संभावना होती है और ये संक्रमण शिशु के मस्तिष्क के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
निष्कर्ष :
ये था हमारा आज का आर्टिकल हर्पीस क्या है ? हर्पीस में क्या नहीं खाना चाहिए ? उम्मीद है की आपको ये आर्टिकल पसंद आएगा। हमारा यह लेख आपको कैसा लगा नीचे Comment Box में टाइप करे और अपने विचार हमारे साथ साझा करे।
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