प्रेम पर संस्कृत श्लोक ! Sanskrit shlok on love with hindi meaning
दोस्तों, प्रेम दुनिया की सबसे अनमोल और खास चीज है, जो लोग किसी भी जीवित चीज से प्रेम करते है वो अपने जीवन में सदैव खुशहाल रहते है ऐसे लोग तनाव से दूर रहते है.
हालांकि आज के समय में प्रेम के अनेक अर्थ और परिभाषाएं बन चुकी है लेकिन जो प्रेम की फीलिंग है वह हमेशा के एक ही रहेगी। यहां पर हम आपको कुछ प्रेम पर संस्कृत श्लोक देंगे, जिनका अर्थ आपकी जिंदगी से जुड़ता हैं। ये श्लोक निम्नलिखित हैं :
1. जननी जन्मभूमिश्च, स्वर्गादपि गरियसी
हिंदी में अर्थ : हमारी जिंदगी में मां और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर चीज हैं।
2. प्रदोषे दीपक रू चंद्ररू, प्रभाते दीपकरूरविरू।
त्रैलोक्ये दीपकरूधर्मरू, सुपुत्ररू कुलदीपकरू।।
हिंदी में अर्थ : संसार के चक्र में संध्या काल (शाम) में चंद्रमा दीपक के समान है और सुबह (प्रभात) में सूर्य दीपक के समान है, एवं संसार के तीनों लोक में धर्म ही दीपक है और एक सुपुत्र ही कुल का दीपक होता है।
3. प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यंति जंतव:।
तस्मात तदेव व्यक्तव्यं वचने का दरिद्रता।।
हिंदी में अर्थ : जिंदमी में अच्छे वचन बोलने से हर व्यक्ति खुश हो जाता है और मधुर वचन से पराया भी अपना बन जाता है। इसलिए अच्छे वचनों में कंजूसी न करें।
4. पिता स्वर्ग: पिता धर्म: पिता परमकं तप:।
पितरि प्रीतिमापन्ने सर्वा: प्रीयंति देवता:।।
हिंदी में अर्थ : सभी पिता अपने बच्चों के लिए स्वर्ग, धर्म और परम तपस्या हैं। उनकी खुशी देवताओं की खुशी हैं।
5. पितृ देवों भव:।।
हिंदी में अर्थ : हमारे पिता देवताओं के समान हैं।
इसके अलावा भी अगर आपको संस्कृत में श्लोक पढना पसंद है तो आपको ये शानदार संस्कृत श्लोक जरुर पढने चाहिए – 25 संस्कृत श्लोक अर्थ सहित
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