प्यार अन्तर्जातीय विवाह और करियर की उठापटक Inter Caste Marriage Advantages Disadvantages In Hindi
Inter Caste Marriage Advantages Disadvantages In Hindi
यहाँ पर इन सभी जटिल मुद्दों को एक साथ स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है क्योंकि ये तीन विषय एकसाथ या फिर किन्हीं दो अथवा एक के रूप में कई व्यक्तियों के जीवन की युवावस्था में छाये रहते हैं जहाँ व्यक्ति को मानसिक, आर्थिक व सामाजिक-पारिवारिक द्वंद्वों के बीच से अपनी जीवन यात्रा जारी रखनी पड़ती है परन्तु आत्मघाती विचार अपनाने वाले युवाओं को अलग से मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है जिसके कारण यह आलेख तैयार किया जा रहा है।
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Inter Caste Marriage Advantages Disadvantages In Hindi
संगी-साथियों व मीडिया की बातों में आकर शारीरिक रूप से आकर्षित न होना, शारीरिक आकर्षण को प्यार मत समझ बैठना, यदि शादी करनी हो तो भी करियर को साथ लेकर चलना आवश्यक है क्योंकि सब साथ छोड़ जायें तो भी युवती व युवक के लिये कम से कम आर्थिक रूप से स्वावलम्बी बने रहना तो जरुरी है कि ताकि बिना किसी के सहारे अस्तित्व बचाया जा सके.
1. आर्थिक आत्मनिर्भरता –
आजकल तो लड़कों से अधिक लड़कियों की आर्थिक आत्मनिर्भरता अधिक आवश्यक लगती है क्योंकि बुज़ुर्ग होता बेरोज़गार बेटा भी अपने परिवार अथवा पुश्तेनी परिसम्पत्तियों के सहारे पल सकता है परन्तु बिन ब्याही और तलाकशुदा या घर-समाज से तिरस्कृत की गयी बेटी को तो लक्ष्मी मैय्या ही सँभाल पाती हैं।
विशेष रूप से प्यार में पड़ चुकी या अन्तर्जातीय विवाह (Inter Cast Marriage) को तैयार युवती के लिये आर्थिक स्वावलम्बन युवक से भी अधिक आवश्यक है ताकि अनदेखे भविष्य में चाहे जो हो जाये – कम से कम भूखी-प्यासी मरने की नौबत तो न आये।
लड़के की स्थिति भी ख़राब हो सकती है परन्तु वह चाहे जो करले. परिवार व समाज उसे बेमन से या जैसे-तैसे प्राय: वापस अपना ही लेता है परन्तु बचपन से परायाधन व अपना बोझ मानी जाने वाली लड़की यदि समय रहते पारिवारिक-सामाजिक मान्यताओं के अधीन शीघ्र ही स्वजाति में विवाह बन्धन में नहीं बँधती तो उसके साथ डिस्पोज्ड गार्बेज (Dispose Garbage) जैसा व्यवहार किया जाने लगता है जिसे दोबारा अपनाया नहीं जाता। इस गम्भीर सामाजिक विडम्बना में आमूल-चूल सुधार तुरंत अति आवश्यक है।
वैसे भी पति हर स्थिति में यदि सच में साथ निभाये तब तो ठीक परन्तु यदि तथाकथित ‘Owner Killing’ के नाम पर उसे मार दिया गया या परिवार के कहने से अथवा समाज के दबाव अथवा किसी विवशता के नाम पर उसने पत्नी को छोड़ दिया या वृद्धावस्था में पति की मृत्यु हुई एवं मूल परिवार (अपने मायके) वालों ने अपनाने ने मना कर दिया तो ससुराल पक्ष में अपना अधिकार जताना सामाजिक, पारिवारिक व वैधानिक दुविधाओं से भरा हो सकता है.
इसलिये अपनी आर्थिक आत्मनिर्भरता अनिश्चित भविष्य के प्रति स्वयं को सामाजिक, पारिवारिक व व्यक्तिगत रूप से भी तैयार रखेगी। आशावादी होना तब ठीक होगा यदि प्रतिकूल व्यावहारिक परिस्थितियों के प्रति अग्रिम रूप से समस्त तैयारियाँ भी कर ली गयीं हों।
2. जीवन साथी के विकल्प –
आर्थिक आत्मनिर्भरता (कम से कम इतनी तो हो कि स्वयं को पर्याप्त रूप से सँभाला जा सके) हो तो आज नहीं तो कल स्वजाति या परजाति के जीवन साथी मिलने की सम्भावना बनी ही रहेगी परन्तु यदि आर्थिक स्वावलम्बन (Financial Independent) के अभाव से समाज अथवा परिवार ने दुत्कार दिया तो लड़का व लड़की दोनों के लिये, विशेष रूप से लड़की के लिये स्थितियाँ अनियन्त्रणीय जैसी लग सकती हैं।
कुछ दिन जिन्दा रहना भी कठिन लग सकता है क्योंकि अब तक अपने आप का मुखौटा लगाये लोग अचानक बैरियों जैसा व्यवहार करने लगते हैं कि खाना तो दूर, पानी भी नहीं पूछते, फ़ोन तक नहीं उठाते, यदि उनके घर गये तो हो सकता है कि किसी के मुँह से ” वे घर पर नहीं हैं ” झूठ बुलवा दें।
3. दोनों परिवारों में सांस्कृतिक सामंजस्य –
स्वजाति-विवाह में भी दोनों परिवारों में आपसी सामंजस्य कठिन हो सकता है किन्तु भिन्न सांस्कृतिक इत्यादि पृष्ठ भूमियों के पक्ष हुए तो इसके सुप्रभाव व दुष्प्रभाव दोनों होंगे. सांस्कृतिक एकता व परजातीय मेल-मिलाप को बढ़ावा मिलेगा, जातिगत पूर्वाग्रह घटेंगे परन्तु एक-दूसरे के परिवार वाले भी एक-दूसरे के रीति-रिवाजों को उतनी सरलता से स्वीकार लें यह आवश्यक नहीं.
सभी पक्षों को एक-दूसरे का सम्मान करना होगा, बिना समझौता कराये सुख से साथ रहना सीखना होगा.. झुकाकर अथवा अपनी ही बात मनवाकर धौंस जमाने की आदत छोड़नी होगी, आने वाली पीढ़ी (यदि आयी तो) तब एकता के महत्त्व को समझने की हालत में आ पायेगी यदि अभी इन दोनों परिवारों के पारस्परिक हालात सदा सहज रहें।
4. आत्मनिर्भरता देखे –
विवाह चाहे स्वजातीय हो अथवा विजातीय, लवमैरिज अथवा अरैन्ज मैरिज, विवाह किया जाये अथवा नहीं दोनों लिंगों, विशेष रूप से पुरुष के लिये आत्मनिर्भरता अति आवश्यक होती ही है। यदि विकलांगता, बेरोज़गारी या अन्य कोई विवशता न हो आर्थिक रूप से अनुत्पादक पुरुष को प्राय: समाज अथवा परिवार सहर्ष नहीं स्वीकारा करता।
5. भविष्य की तैयारियाँ –
विवाह की बात हो या अन्य कोई विषय अथवा निर्णय भविष्य को मानसिक, शारीरिक, आर्थिक, पारिवारिक व सामाजिक रूप से तैयार कर लेना महत्त्वपूर्ण है. ‘सब कुछ Control में हो या हो जाये’ ऐसा मानने को नहीं कहा जा रहा परन्तु ऐसी मानसिकता तो हो कि अब चाहे आगे अपनी व जीवनसाथी की परिस्थितियाँ एवं उसकी मनःस्थितियाँ इत्यादि चाहे जैसी भी हों मैं संतोष पूर्ण रूप से सब सँभाल सकूँगी या सकूँगा.
इससे होगा यह कि हर सम्भावित अप्रत्याशित समय के लिये पूर्व मानसिक तैयारी रहेगी, फिर भी यदि कुछ अत्यधिक असम्भावित हो जाता है तो भी असह्य आघात नहीं पहुँचेगा. समस्त प्रतिकूलताओं में भी अनुकूलता के अवसर का सृजन करने का सामर्थ्य बचा ही रहेगा। चाहे जो कुछ हो, कोई कुछ भी कर दे परन्तु हर स्थिति में हताशा – निराशा से बचकर चलना ही होगा. हैरान-परेशान होकर ग़लत कदम उठाने अथवा हतप्रभ होकर बैठ जाने का विचार भी नहीं करना है.
लड़का व लड़की को उपरोक्त सभी विषयों में खुलकर समस्त विकल्पों का विचार-विमर्श करते हुए फिर अन्तिम निष्कर्ष पर पहुँचना चाहिए, बेहतर तो यह रहेगा कि भविष्य के सपने सँजोने का आरम्भ करने से भी पहले यह सब ठोस रूप से चर्चा व तैयारी के रूप में सम्पन्न कर लें क्योंकि भविष्य किसने देखा है ?
तो दोस्तों यह लेख था इंटरकास्ट मैरिज के फायदे व नुकसान, Inter Caste Marriage Advantages Disadvantages In Hindi, Inter Caste Marriage ke benefit, Caste Marriage Hindi Me. यदि आपको यह लेख पसंद आया है तो कमेंट करें। अपने दोस्तों और साथियों में भी शेयर करें।
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इंटरकास्ट मैरिज का चित्रण बड़े अच्छे तरीके से किया गया है। इसमे एक परेशानी यह भी आती है दोनो के बच्चे होने पर बच्चों के सामने भी दो तरह के समाज से सामंजस्य बिठाना पडता है।