बचपन पर हिंदी कविता Bachpan Par Kavita
दोस्तों, चाहे आपका बचपन हो या फिर हमारा.. हर किसी को अपने बचपन की यादें जरुर आती है और हर कोई चाहता है की वह एक बार फिर से अपने बचपन के पलों को दोबारा जी सके. पर ऐसा होना संभव तो नहीं लेकिन हम छोटे बच्चो के साथ खेलकर या अपने बचपन की यादो को ताजा करके बचपन को थोडा फील जरुर कर लेते है. आइये इस कविता को पढ़िए.. यह कविता भी आपको आपके बचपन की याद जरुर दिला देगी.
सबसे सुनहरा पल है बचपन
बीते कल का सुकून है बचपन।
बैर, द्वेष से कोसो दूर
कोई चिंता की न थी होड़
केवल खेल-खिलोने थे भाते,
दोस्तो संग खुब समय थे बिताते।
वो बचपन के खेल खूब याद आते।
वो छुपन-छुपाई, वो नदी-पहाड़
कभी गिल्ली-डंडा तो कभी पिट्ठू
या याद आती कभी पतंग की बाज़ी।
कट जाती थी जब पतंग दौड़
आज भी मन को खूब ललचाती।
वो राजा, मंत्री, चोर, सिपाही, वो कैरम की गोटी,
वो भँवरे का घूमना या घोड़ा-बादाम छाई कर भागना।
हाय ये बचपन के खेल मे
मैं अब भी हूँ डुब जाती।
डूबने से याद आया फिर पानी
कागज की कश्ती और नानी की कहानी।
काश समय फिर लौट आ जाए
काश हम फिर बच्चे बन जाए।
भारती विकास(प्रीति)
यह बेहतरीन हिंदी कविता हमें भेजी है भारती विकास प्रीति जी ने. हम प्रीति जी के उज्जवल भविष्य की कामना करते है और उम्मीद करते है की उनके बेहतरीन हिंदी कविता फिर इस ब्लॉग पर प्रकाशित हो. धन्यवाद भारती जी.
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Bahut Aachi Kavita Hai Aapki
बहुत अच्छी कविता है
बचपन की याद दिला गयी